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कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को जनà¥à¤® से ही हो जाता है पीलिया, à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ बता रहे हैं इसका कारण और बचाव के उपाय
आजकल जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को जनà¥à¤® के à¤à¤•-दो दिन के अंदर ही पीलिया की शिकायत होने लगती है। कà¥à¤¯à¤¾ ये वे गरà¥à¤ से साथ लेकर आते हैं या डिलीवरी के बाद के बदलाव के कारण à¤à¤¸à¤¾ होता है?
नवजात शिशà¥à¤“ं में पीलिया बहà¥à¤¤ आम बात है। आमतौर पर नवजात शिशà¥à¤“ं में पीलिया होने का खतरा जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है। हालांकि, यह बचà¥à¤šà¥‡ में à¤à¤• से दो सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के à¤à¥€à¤¤à¤° अपने आप आसानी से ठीक हो जाता है। अगर पीलिया का सà¥à¤¤à¤° ऊंचा है, तो बचà¥à¤šà¥‡ को हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ कराना पड़ सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में आपके मन में à¤à¥€ यही खà¥à¤¯à¤¾à¤² आता होगा कि इतनी देखà¤à¤¾à¤² के बाद à¤à¥€ आखिर बेबी को पीलिया कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ हो गया! तो परेशान न हों, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आपके सà¤à¥€ सवालों के जवाब लेकर हम यहां हैं।Â
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ हो जाता है नवजात शिशà¥à¤“ं को पीलियाÂ
नवजात में पीलिया होने के कई कारण हैं। पूना सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ सहà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¥à¤°à¥€ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² के नियोनेटोलॉजिसà¥à¤Ÿ डॉकà¥à¤Ÿà¤° पà¥à¤°à¤¦à¥€à¤ª सूरà¥à¤¯à¤µà¤‚शी कहते हैं कि नवजात में पीलिया होने की सबसे बड़ी वजह मां और शिशॠका बà¥à¤²à¤¡ गà¥à¤°à¥à¤ª अलग-अलग होना है। अगर मां का बà¥à¤²à¤¡ गà¥à¤°à¥à¤ª नेगेटिव है और बेबी का बà¥à¤²à¤¡ गà¥à¤°à¥à¤ª पॉजिटिव है, तो नवजात को पीलिया हो सकता है। तो आइठजानते हैं नवजात शिशà¥à¤“ं में पीलिया किन परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¯à¥‹à¤‚ में हो सकता है और इसका उपचार कà¥à¤¯à¤¾ है?Â
नवजात शिशà¥à¤“ं में पीलिया के कारण कà¥à¤¯à¤¾ है?
शिशà¥à¤“ं में पीलिया बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ नामक पदारà¥à¤¥ की अधिकता के कारण होता है। शरीर में बिलीरूबिन का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ तब होता है जब रकà¥à¤¤ की लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाà¤à¤‚ टूटने लगती है। इससे लीवर रकà¥à¤¤ से बिलीरूबिन को बाहर निकालने लगता है। नवजात शिशà¥à¤“ं पीलिया होने की मà¥à¤–à¥à¤¯ वजह है लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं के टूटने में सामानà¥à¤¯ वृदà¥à¤§à¤¿ होना है। बता दें कि शिशà¥à¤“ं का इमैचà¥à¤¯à¥‹à¤° लीवर रकà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ से बिलीरूबिन को हटाने में अकà¥à¤·à¤® होता है। इस कारण बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पीलिया होता है।
मां के रकà¥à¤¤ में किसी तरह की असंगति होने की वजह से जनà¥à¤® के बाद नवजात में पीलिया हो सकता है। दरअसल, मां के शरीर में बनने वाले à¤à¤‚टीबॉडी à¤à¥à¤°à¥à¤£ की रकà¥à¤¤ कोशिकाओं पर हमला करता है। जो लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं के टूटने की वजह बन सकती है। इस वजह से à¤à¥€ नवजात में पीलिया हो सकता है। Â
पॉलीसिथेमिया नामक à¤à¤• दà¥à¤°à¥à¤²à¤ बीमारी के कारण à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पीलिया हो सकता है। इस बीमारी में रकà¥à¤¤ में अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• मातà¥à¤°à¤¾ में लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ होने लगता है। Â
हेमोलिसिस नाम की बीमारी के कारण à¤à¥€ शिशà¥à¤“ं में पीलिया हो सकता है। इस बीमारी के कारण सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं नषà¥à¤Ÿ होने लगती है। Â
डिलीवरी के दौरान शिशॠकी सेफलोहेमेटोमा नाम की खोपड़ी चोट लगने के कारण à¤à¥€ पीलिया हो सकता है। दरअसल, खोपड़ी में चोट के कारण रकà¥à¤¤ कोषिकाà¤à¤‚ टूटने लगती है। जिससे बिलीरूबिन का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है। Â
जनà¥à¤® के दौरान कà¤à¥€-कà¤à¥€ नवजात कà¥à¤› मातà¥à¤°à¤¾ में खून निगल जाता है। यह निगला हà¥à¤† खून बचà¥à¤šà¥‡ की आंतों पर कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤‚चाता है। इससे à¤à¥€ शरीर में बिलीरूबिन में वृदà¥à¤§à¤¿ हो जाती है। Â
अगर मां को डायबिटीज है, तो à¤à¥€ नवजात शिशॠको पीलिया हो सकता है।  Â
कà¥à¤°à¤¿à¤—लर-नजà¥à¤œà¤° सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® और लà¥à¤¸à¥€-डà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤•ॉल सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® à¤à¥€ पीलिया का कारण बन सकता है।Â
इसके अलावा नवजात शिशॠमें पीलिया मेडिकल कंडीशनà¥à¤¸ के कारण à¤à¥€ हो सकता है।
कैसे पहचानें कि बेबी को पीलिया हà¥à¤† हैÂ
à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ का कहना है कि पीलिया में नवजात की तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग पीला रंग पड़ जाता है और आंखें सफेद हो जाती है। पीलिया सिर से हाथ, सीने और अंत में पैरों तक फैल जाता है। नवजात की हथेलियों के ऊपर और घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के नीचे à¤à¥€ पीलिया के लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देने लगते हैं। पीलिया की जांच का सबसे आसान तरीका यही है कि बचà¥à¤šà¥‡ की à¤à¤• उंगली दबाà¤à¤‚। इसके बाद वह जगह अगर सफेद हो जाठतो बचà¥à¤šà¤¾ सामानà¥à¤¯ है। लेकिन अगर ऊंगली पीली ही रहे तो समà¤à¥‹ बचà¥à¤šà¥‡ को पीलिया है। Â
बड़े बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पीलिया के लकà¥à¤·à¤£ तब दिखाई देने लगते हैं, जब उनके रकà¥à¤¤ में बिलीरूबिन की मातà¥à¤°à¤¾ 2 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿ डेसीलीटर से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो जाà¤à¥¤ वहीं, नवजात बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पीलिया के लकà¥à¤·à¤£ उस समय दिखाई देना शà¥à¤°à¥‚ हो जाते हैं जब उनके रकà¥à¤¤ में बिलीरूबिन की मातà¥à¤°à¤¾ 5 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿ डीà¤à¤² हो जाà¤à¥¤ नवजात में पीलिया के लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देते ही उचित उपचार कराना चाहिà¤à¥¤ पीलिया की अधिकता के कारण बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• को कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤‚च सकती है, जिसे करà¥à¤¨à¤¿à¤•टेरस कहा जाता है। Â
पीलिया होने पर आपके नवजात शिशॠको बà¥à¤–ार आ सकता है और वह अनमना और बीमार रहने लगता है। Â
कब आपको डॉकà¥à¤Ÿà¤° के सहायता की जरूरत होगीÂ
अगर आप के बेबी को पीलिया हो गया है और उसकी आप घर पर ही देखà¤à¤¾à¤² कर रहे हैं, तो à¤à¤• बार अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° को जरूर दिखाà¤à¤‚। पीलिया के अगर बचà¥à¤šà¥‡ के हाथ पैरों में फैल गया और à¤à¤• सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय हो गया तो उसे हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में à¤à¤¡à¤®à¤¿à¤Ÿ के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह मशविरा लें।
बचà¥à¤šà¤¾ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• बीमार है और खाने से इंकार कर रहा है। इसके अलावा बचà¥à¤šà¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नींद ले रहा है, उसके हाथ पैर फूलने लग रहे होे और उसका तापमान 100.4 डिगà¥à¤°à¥€ सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ या इससे अधिक हो तो तà¥à¤°à¤‚त चिकितà¥à¤¸à¤¾ सहायता लेनी चाहिà¤à¥¤Â Â
अगर आपके बचà¥à¤šà¥‡ को सांस लेने में किसी तरह की दिकà¥à¤•त हो रही हो और वह नीला पड़ गया हो तो तà¥à¤°à¤‚त हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² जाà¤à¤‚।Â
डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको ये टेसà¥à¤Ÿ करवाने के लिठकह सकते हैंÂ
बचà¥à¤šà¥‡ में पीलिया की सही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की जांच के लिठबाल रोग विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ से जांच कराà¤à¤‚। इससे शरीर में बिलीरूबिन की सही मातà¥à¤°à¤¾ का पता लगाया जा सकता है। कà¥à¤› चिकितà¥à¤¸à¤• उपकरणों के जरिठबिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ को मापा जा सकता है।
बचà¥à¤šà¥‡ का कॉमà¥à¤¬à¥à¤¸ टेसà¥à¤Ÿ करवाया जा सकता है जो शरीर में à¤à¤‚टीबॉडी की जांच करता है। इससे रकà¥à¤¤ की मृत लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं का पता लगाया जा सकता है।
रेटिकà¥à¤²à¥‹à¤¸à¤¾à¤‡à¤Ÿ काउंट टेसà¥à¤Ÿ किया जाता है। इसके जरिठयह पता लगाया जा सकता है कि शिशॠके रकà¥à¤¤ में लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाà¤à¤‚ ठीक से निरà¥à¤®à¤¾à¤£ हो रही है या नहीं।
इसके अलावा बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ कराया जा सकता है।
नवजात शिशà¥à¤“ं में पीलिया के कà¥à¤› घरेलू नà¥à¤¸à¥à¤–ेÂ
जनà¥à¤® के समय बचà¥à¤šà¥‡ को पीलिया होना सामानà¥à¤¯ बात है। हालांकि, इसके उपचार के कई तरीके हैं,जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आप नवजात शिशà¥à¤“ं में पीलिया के इलाज के लिठआजमा सकते हैं-Â
शिशॠको बार-बार सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराà¤à¤‚Â
यदि आपके नवजात शिशॠको पीलिया है, तो उसे बार-बार दूध पिलाà¤à¤‚। नवजात शिशॠको बार-बार सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने से रकà¥à¤¤à¤ªà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ बà¥à¤¤à¤¾ है और बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ के मल और मूतà¥à¤° के जरिठबाहर निकालने में मदद मिलती है। बता दें कि पीलिया होने पर बचà¥à¤šà¥‡ बहà¥à¤¤ सोते हैं। अगर आपके बचà¥à¤šà¥‡ को पीलिया है, तो वह à¤à¥€ बहà¥à¤¤ सो सकता है। लेकिन उसे दूध पिलाने या खाने के लिठनियमित समय जगाà¤à¤‚।
मां को à¤à¥€ लेना चाहिठसà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ आहारÂ
इसके अलावा जो मां नवजात शिशà¥à¤“ं को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराती है उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हेलà¥à¤¦à¥€ डाइट को फॉलो करना चाहिà¤à¥¤ मां को अपने आहार में ताजा, पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•, संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ शामिल करना चाहिà¤à¥¤ इसके लिठहरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में à¤à¤• बार सी फूड, हेलà¥à¤¦à¥€ फैट वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥, सीडà¥à¤¸, नटà¥à¤¸, फल, मांस और फाइबर यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार खाà¤à¤‚। à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ का मानना है कि मां जब अपने बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराती है। तब दोनों की सà¥à¤•ीन à¤à¤•दूसरे के संपरà¥à¤• में आती है। इससे à¤à¥€ बिलीरूबिन का सà¥à¤¤à¤° घटता है। Â
बेबी को धूप में लेटाà¤à¤‚Â
अगर आपके शिशॠको पीलिया है तो उसे रोजाना 1-2 घंटे धूप में रखें। हालाà¤à¤•ि, इस दौरान à¤à¤•दम तीखी धूप की बजाय सà¥à¤¬à¤¹ सà¥à¤¬à¤¹ की धूप हो। सूरà¥à¤¯ की किरणें रकà¥à¤¤ में बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ को कम करने और पीलिया को ठीक में मददगार है।Â
बचà¥à¤šà¥‡ की मालिश नियमित करेÂ
à¤à¤• सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ से पता चला है कि हर दिन हलà¥à¤•ी धूप में बचà¥à¤šà¥‡ की तेल से मालिश करने से बचà¥à¤šà¥‡ के आसानी मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— में मदद मिलती है। जिससे बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ को बाहर निकालने में सहायता मिलती है।Â
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